Zindagi.

कभी मैं ज़िन्दगी को

तो कभी मैं इन यादों को

तराशने की कोशिश करता था

इन लमहों को बयां करने वाले

ख़्वाबों को ढूँढ़ने की कोशिश करता था

मैं ज़िन्दगी का गुलाम था बस

चलता रहता था

कहीं इधर तो कहीं उधर बस

दर दर मरता रहता था

कभी ज़िन्दगी तो कभी दोस्त 

धोखा देते थे

दोस्त कौन और दुश्मन कौन

ये मालूम नहीं बस मुझे

रोता देखना चाहते थे 

क्या करूँ क्या ना करूँ

बस इसी में उलझा सा रहता था

ज़ालिम थी ज़िन्दगी या फिर

ज़ालिम थी मेरी तकदीर

दोनों में से कौन ये मालूम नहीं

 बस इसी में पलता रहता था

यादों का पता नहीं

नसीब मेरा खराब था

कातिल कोई और था

मगर गुन्हेगार मैं था

ज़िन्दगी का ये कैसा खेल था 

जीतता कोई और था

और हमेशा हारता मैं था।

Haddd.

इस ‘हद’ की कोई हद नहीं

ये किसी की है तो किसी की कोई लत नहीं

लोगों के रंग बदलते हैं जैसे बैठकों के साथ

मगर इसका कोई भी अपना रंग नहीं

‘हद’ एक कानून भी है और एक गुनाह भी

मगर वकीलों की ये पूरी वकालत नहीं

मैं अक्सर जब भी अपनी ‘हद’ पे आता हूँ

तो गुस्सा, नफरत, दिल टूटना ये सब हो जाता है

क्योंकि इसकी मोहब्बत से कोई खास मोहब्बत नहीं

‘हद’ का मतलब ना तुम जानती हो

ना ही मैं जानता हूँ

मगर ‘हद’ शायद बेसुलझा सवाल नहीं

क्योंकि ‘हद’ जब अपनी ‘हद’ पार आता है

तो वो वही समझाता है जो तुम समझते हो

इश्क करवाता है, नफरत पालवाता है

और हम सोचते हैं ‘हद’ ठहरा बेसमझ

मगर सच में ‘हद’ कोई बेसमझ नहीं

तुमने तो कह दिया बस लिख डालो ‘हद’ के बारे में

मगर ये कोई पहले पढ़ा हुआ ख़त नहीं

जिसके बारे में मैंने पहले पढ़ा हो शायद कहीं

मगर सच में मुझे लगता है इस ‘हद’ की शायद कोई ‘हद’ नहीं।

Mera Dard.

मेरा दर्द एक दर्द है

मेरी राहें बस मेरा एक फ़र्ज़ है

जिसे मैं ना चाहते हुए भी पाना चाहता हूँ

मैं कभी नहीं पहुँचूँगा अपनी मंज़िल तक

ऐसा मुझे डर है

जो वक़्त गुज़र गया वही मेरा गम है

मैं ना चाहते हुए भी किसी और मंज़िल

तक घसीटता चला जाऊंगा

किसी को खुशी तो किसी को रुलाऊँगा

मेरा दिल मुझ से बार बार कहेगा कि

‘अबी’ ये ही ज़िन्दगी है।

Chehra.

जो उसका चैहरा है

मैंने सालों पहले देखा था

मगर वो अब तक मेरे दिल में ठहरा है

वो इश्क़ करने के लिए बनी थी

मैं उसको इश्क़ की नज़रों से देखता था

जो उसका नूर है वो अब तक

मेरे दिल में दे रहा पहरा है

वो मुझ से कोसों दूर है बस तस्वीर

साथ में लेकर उसे ढूँढ़ रहा हूँ मैं

गलियों में शहरों में, लोगों से

उसके बारे में पूछ रहा हूँ मैं

उसका चैहरा मैं कुछ हद तक भूल चुका हूँ

बस उसका नाम याद है

ये कम्बख्त दिल उसे आजतक ढूंढ़ रहा है

‘अबी’ क्या कर सकता है

इस दीवाने को दिल लगाने की आदत है

वो उसके बिना हर दिन मर रहा है

जो उसका चैहरा है

मैंने सालों पहले देखा था

मगर वो अब तक मेरे दिल में ठहरा है।